⚕️ नीचे दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यह पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी चिकित्सा स्थिति के बारे में आपके कोई भी प्रश्न हों तो हमेशा अपने चिकित्सक या अन्य योग्य स्वास्थ्य प्रदाता की सलाह लें।
कोई भी दवा शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर और हेपेटोलॉजिस्ट से सलाह लें।
भारत में लगभग 4 करोड़ लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस B से और 60-120 लाख लोग हेपेटाइटिस C से पीड़ित हैं। इनमें से कई लोगों में मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज़ भी है — और वे GLP-1 दवाओं के लिए उम्मीदवार हैं।
अच्छी खबर: सेमाग्लूटाइड और टिर्ज़ेपेटाइड मुख्यतः लिवर के एंजाइम सिस्टम से नहीं टूटती — इसलिए ये अधिकांश लिवर दवाओं से कम प्रभावित होती हैं।
भारत में अधिकांश हेपेटाइटिस C मरीज़ अब DAA उपचार से ठीक हो चुके हैं। अगर SVR12 मिल गई है, तो आप मानक रोगी की तरह GLP-1 ले सकते हैं।
अगर अभी DAA चल रही है: पहले 12 हफ्ते का कोर्स पूरा करें, SVR प्राप्त करें, फिर GLP-1 शुरू करें।
| जांच | कब |
|---|---|
| ALT, AST, बिलीरुबिन | शुरू से पहले और हर 3 महीने |
| HBV DNA (अगर हेप B है) | साल में 1-2 बार |
| किडनी फंक्शन (eGFR) | अगर टेनोफोविर पर हैं |
| अल्ट्रासाउंड | साल में एक बार (HCC निगरानी) |
GLP-1 दवाएं लिवर की चर्बी कम करती हैं (हेपेटिक स्टेटोसिस)। हेपेटाइटिस B/C + मेटाबोलिक सिंड्रोम वाले मरीज़ों के लिए यह अतिरिक्त लाभ हो सकता है।
किसी भी दवा से पहले और उपचार के दौरान अपने डॉक्टर से परामर्श करें।